
संस्थापक के बारे में


छबिनाथ समदर्शी
विद्वान, लेखक, कवि एवं धर्माध्यक्ष फाउंडेशन के संस्थापक
छबिनाथ समदर्शी एक विद्वान, लेखक, कवि और सामाजिक चिंतक हैं। उनके कार्यों में समाज कार्य, मनोविज्ञान, दर्शन, मानव विकास तथा भारत की आध्यात्मिक और नैतिक परंपराओं का समन्वय दिखाई देता है। उनकी शैक्षणिक और साहित्यिक यात्रा मानव जीवन को समझने, सामाजिक समस्याओं पर विचार करने और भारतीय दार्शनिक चिंतन की समकालीन समाज में प्रासंगिकता को सामने लाने के प्रयासों से जुड़ी रही है।
उनका जन्म 10 अप्रैल 1987 को उत्तर प्रदेश के गाजीपुर जिले के सुल्तानपुर गाँव में हुआ। उन्होंने पूर्वांचल विश्वविद्यालय, जौनपुर से भूगोल में स्नातक और स्नातकोत्तर की उपाधियाँ प्राप्त कीं। इसके बाद उन्होंने महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय, वर्धा, महाराष्ट्र से समाज कार्य में स्नातकोत्तर (MSW), एम.फिल. और पीएच.डी. की उपाधियाँ प्राप्त कीं। उन्होंने एम.फिल. में स्वर्ण पदक हासिल किया। इसके अतिरिक्त, उन्होंने एनजीओ प्रबंधन में भी स्वर्ण पदक के साथ उपाधि प्राप्त की। उनके शोधकार्य को भारतीय सामाजिक विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICSSR) द्वारा प्रदान की गई शोध फेलोशिप का सहयोग मिला।
शैक्षणिक और साहित्यिक योगदान
उनकी शैक्षणिक रुचियों में समाज कार्य, मनोविज्ञान, समाजशास्त्र, मानव विकास, दर्शन, भारतीय ज्ञान परंपरा तथा आध्यात्मिक ज्ञान और दैनिक मानवीय अनुभवों के बीच संबंध प्रमुख हैं। अपने लेखन के माध्यम से वे अकादमिक विचारों को सरल और सुगम रूप में प्रस्तुत करने के साथ-साथ व्यक्ति, समुदाय और समाज के लिए उनकी प्रासंगिकता को समझने का प्रयास करते हैं।
उनकी अंग्रेज़ी में प्रकाशित पुस्तकों में Psychiatric Social Work, Theory and Behavior of Social Case Work, Theory and Behavior of Social Group Work, Dimension of Social Work, Communication in Contemporary World, Community Organization in Social Work, Social Action with Social Work, Human Development and Personality, Swami Vivekanand Social Work With Sadhana तथा Sociology in Western World शामिल हैं।
उनकी हिंदी में प्रकाशित पुस्तकों में सफलता का मनोविज्ञान, चिकित्सकीय समाज कार्य के आयाम और गांधी दृष्टि, संकट का मनोविज्ञान और श्रीमद्भगवद्गीता, सहमति निर्माण का मनोविज्ञान और झूठ का संचार, इमैनुएल कांट का शिक्षा दर्शन (अनुवाद), प्रकृति का मनोविज्ञान, समाज कार्य की मनोसामाजिक दृष्टि: मैरी रिचमंड तथा दर्शन में गांधी शामिल हैं।
उनकी साहित्यिक यात्रा में चार कविता-संग्रह भी शामिल हैं—रेखा, राम अभी तो वन में हैं, राधेश्याम और भक्ति तो रावण भी करता था। उनके अकादमिक और रचनात्मक लेखन में मानवीय व्यवहार, नैतिक उत्तरदायित्व, सामाजिक संबंधों, दार्शनिक चिंतन तथा समकालीन जीवन में मूल्यों की भूमिका जैसे विषयों पर विचार मिलता है।
श्रीमद्भगवद्गीता के प्रति वैचारिक जुड़ाव
श्रीमद्भगवद्गीता के दार्शनिक, मनोवैज्ञानिक और नैतिक पक्ष छबिनाथ समदर्शी के बौद्धिक कार्यों में विशेष स्थान रखते हैं। वे गीता को मानवीय दुविधाओं, मानसिक संघर्षों, कर्तव्य, निर्णय लेने की प्रक्रिया और सार्थक कर्म की खोज पर विचार करने के एक महत्त्वपूर्ण स्रोत के रूप में देखते हैं।
उनकी पुस्तक संकट का मनोविज्ञान और श्रीमद्भगवद्गीता मनोवैज्ञानिक संकटों और गीता की शिक्षाओं के बीच संबंधों की पड़ताल करती है। उन्होंने श्रीमद्भगवद्गीता पर एक टीका भी लिखी है। इसके माध्यम से वे गीता के शाश्वत ज्ञान को समकालीन मानव जीवन के संदर्भ में प्रस्तुत करना चाहते हैं।
उनके लिए गीता का अध्ययन नैतिक आचरण, आत्मबोध, उत्तरदायित्व और व्यक्तिगत विकास तथा दूसरों के कल्याण के बीच संबंधों पर विचार करने का अवसर प्रदान करता है। भारतीय दार्शनिक परंपराओं को सामाजिक चेतना और मानवीय कल्याण से जोड़ने में भी उनकी यह वैचारिक रुचि महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
धर्माध्यक्ष फाउंडेशन की स्थापना
वर्ष 2023 में छबिनाथ समदर्शी ने सनातन संस्कृति, मानवीय मूल्यों, आध्यात्मिक चेतना और श्रीमद्भगवद्गीता की शिक्षाओं को बढ़ावा देने के उद्देश्य से धर्माध्यक्ष फाउंडेशन की स्थापना की। फाउंडेशन की प्रेरणा भगवान श्रीकृष्ण के धर्माध्यक्ष स्वरूप से जुड़ी है। धर्म के अधिष्ठाता और संरक्षक के रूप में श्रीकृष्ण की अवधारणा से प्रेरित होकर संस्था आध्यात्मिक समझ को रचनात्मक सामाजिक सहभागिता से जोड़ने का प्रयास करती है।
फाउंडेशन के प्रमुख कार्यक्षेत्रों में आध्यात्मिक विकास, शिक्षा एवं ज्ञान, स्वास्थ्य और सामुदायिक कल्याण, आजीविका के अवसर, आत्मनिर्भरता तथा मानव कल्याण शामिल हैं। संस्था की परिकल्पना लोगों को सांस्कृतिक और दार्शनिक परंपराओं से जुड़ने के लिए प्रेरित करने के साथ-साथ अपने समुदायों के कल्याण में योगदान देने की भावना को प्रोत्साहित करती है।
फाउंडेशन ने 1 जनवरी 2024 को सदस्यता अभियान की शुरुआत की। इसका उद्देश्य लोगों को संस्था की आध्यात्मिक, शैक्षणिक और सामाजिक पहलों में भागीदारी के लिए आमंत्रित करना है। संस्था 20 दिसंबर 2026 से गीता ज्ञान अर्पण यात्रा प्रारंभ करने की भी योजना बना रही है। इस प्रस्तावित यात्रा का उद्देश्य श्रीमद्भगवद्गीता के संदेश को विभिन्न समुदायों और सामाजिक पृष्ठभूमियों के लोगों तक पहुँचाना तथा उसकी शिक्षाओं को दैनिक जीवन से जोड़ना है।
गोलोक धाम मंदिर की परिकल्पना
धर्माध्यक्ष्य फाउंडेशन की प्रमुख प्रस्तावित पहलों में गोलोक धाम मंदिर परियोजना शामिल है। इसकी परिकल्पना भगवान श्रीकृष्ण की भक्ति, आध्यात्मिक शिक्षा और सनातन सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण को समर्पित एक केंद्र के रूप में की गई है।
इस परियोजना के अंतर्गत भगवान श्रीकृष्ण के जीवन, उनकी लीलाओं और शिक्षाओं से संबंधित 108 मंदिरों अथवा पवित्र स्थलों वाले एक परिसर की योजना प्रस्तावित है। इसकी नियोजित वास्तुकला और भक्तिमय वातावरण के माध्यम से आगंतुकों को श्रीकृष्ण के जीवन तथा उनसे जुड़े दार्शनिक विचारों को समझने के अवसर प्रदान करने का उद्देश्य है।
गोलोक धाम मंदिर फाउंडेशन की दीर्घकालीन परिकल्पना का महत्त्वपूर्ण हिस्सा है। इसका उद्देश्य ऐसा स्थान विकसित करना है, जहाँ भक्ति, सांस्कृतिक शिक्षा और आध्यात्मिक चिंतन का संगम हो सके। संस्था के निर्धारित उद्देश्यों और लागू नियमों के अनुरूप लोग इस परियोजना के विकास में सहयोग और योगदान देकर इससे जुड़ सकते हैं।
ज्ञान, धर्म और मानव कल्याण पर आधारित दृष्टि
छबिनाथ समदर्शी के कार्यों में अकादमिक अध्ययन, साहित्य, आध्यात्मिक चिंतन और सामाजिक उत्तरदायित्व को एक साथ जोड़ने का प्रयास दिखाई देता है। अपनी पुस्तकों, कविता-संग्रहों, श्रीमद्भगवद्गीता पर लेखन और धर्माध्यक्ष्य फाउंडेशन के माध्यम से वे नैतिक जीवन, व्यक्तिगत जिम्मेदारी, सांस्कृतिक समझ तथा मानव कल्याण से जुड़े प्रश्नों पर विचार करने के लिए लोगों को प्रेरित करना चाहते हैं।
उनकी व्यापक दृष्टि ज्ञान को दैनिक जीवन से जोड़ने और आध्यात्मिक मूल्यों तथा समाज सेवा के बीच सार्थक संबंध विकसित करने पर केंद्रित है। फाउंडेशन की प्रस्तावित पहलों और गोलोक धाम मंदिर परियोजना के माध्यम से यह दृष्टि भक्ति, शिक्षा, सामुदायिक सहभागिता और मानवीय कल्याण को महत्त्व देते हुए आगे बढ़ रही है।
इस संकल्प का हिस्सा बनें
धर्माध्यक्ष्य फाउंडेशन के कार्यों के बारे में जानें, प्रस्तावित गोलोक धाम मंदिर की परिकल्पना को समझें और संस्था की आध्यात्मिक, शैक्षणिक तथा सामुदायिक पहलों में योगदान देने के विभिन्न तरीकों की जानकारी प्राप्त करें। आपका सहयोग ज्ञान, संस्कृति, भक्ति और मानव कल्याण से जुड़े इस सामूहिक प्रयास को आगे बढ़ाने में सहायक हो सकता है।
.jpeg)














